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महंगाई भत्ता (DA) एरियर कैलकुलेटर
| Month | Basic Pay | DA Arrear | NPS (10%) | Net Arrear |
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* Note: Annual increment is calculated at 3% and rounded off to the nearest 100.
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मध्यप्रदेश के लिपिकों ने न्यायसंगत वेतन प्राप्त करने के लिए कई दौर देख लिया है परन्तु उनको उनका अधिकार अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। पिछले 40 सालों में 10 से अधिक कमेटियां और साथ ही साथ माननीय उच्च न्यायालय द्वारा लिपिक हित में फैसला होने के बावजूद भी लिपिकों को उनके अधिकार से वंचित रखा गया है। मध्यप्रदेश के लिपिक से कम वेतन प्राप्त करने वालों पदों को पिछले कुछ ही सालों में लिपिक से अधिक वेतनमान के साथ नवाज़ा गया है, परन्तु लिपिकों की भर्ती योग्यता उच्च रखने के बावजूद भी उनके साथ दोहरा रवैया अपनाया गया है।
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| म.प्र. लिपिक 2400/- ग्रेड पे की मांग |
सदैव की तरह मध्यप्रदेश के लिपिकों के साथ एक बार फिर से मज़ाक किया गया, इस बार एक ऐसा आयोग सामने आया जिसकी मांग न तो मध्यप्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने किया और न ही उन्हें उस आयोग के रिपोर्ट आने तक उसके बारे में कुछ पता था। सिंघल आयोग ने अपनी रिपोर्ट जुलाई 2024 में मध्यप्रदेश सरकार को सौंपा, यह मध्यप्रदेश के कर्मचारी संगठनों के लिए एक सदमे के समान था, क्योंकि सिंघल आयोग ने मध्यप्रदेश के लिपिकों की वेतन विसंगति का दावा किया परन्तु लिपिक संघ अथवा किसी अन्य संगठन को यह तक पता नहीं था कि आखिर सिंघल आयोग है क्या, और यह कब बना और किस लिए बना। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बताया गया कि सन् 2020 में तब के तात्कालिक माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी के द्वारा लिपिक/क्लर्क वेतन विसंगति दूर करने के लिए यह आयोग तैयार किया गया था जिसकी रिपोर्ट अब प्राप्त हुई है और जुलाई 2024 में ही सिंघल आयोग का कार्यकाल समाप्त होने को था।
कर्मचारी संगठनों ने सिंघल आयोग का विरोध यह हवाला देते हुए किया कि इस आयोग ने कर्मचारियों व संगठनों से वार्ता किये बिना ही मनमाना रवैया अपनाया होगा, क्योंकि रिपोर्ट सार्वजनिक तो की नहीं गई। इस सब बात को देखते हुए सरकार द्वारा सिंघल आयोग का कार्यकाल दिसम्बर 2024 तक 6 माह के लिए और बढ़ा दिया गया। आज 26 दिसम्बर है और आज तक सिंघल आयोग ने कोई रिपोर्ट वेतन विसंगति दूर कराने के लिए सरकार को कोई रिपोर्ट नहीं सौंपा है। सूत्रों से इस बात का पता चला है कि सरकार सिंघल आयोग को निरस्त करते हुए लिपिकों की वेतन विसंगति दूर कराने के लिए एक नए कमेटी / आयोग का गठन करेगी। इस बात से लिपिक संघ में उदासीनता व आक्रोश व्याप्त हो गया है। दिसम्बर माह में ही मध्यप्रदेश लिपिक संघ ने कई बैठकें कर लिया है और नए साल से अभूतपूर्व आन्दोलन ही राह पर चलने की बात कहा है। अब देखने वाली बात रहेगी कि क्या नए साल 2025 पर लिपिकों की 40 साल पुरानी वेतन विसंगति दूर होती है या नहीं।
वीडियो देखें - म.प्र. लिपिक वेतन विसंगति दूर होने के आसार ख़त्म । साल 2024 के साथ सिंघल आयोग कार्यकाल भी ख़त्म ..
दोस्तों, मेरा नाम अभिषेक है, लम्बे वक़्त के बाद एक बार फिर से सरकारी कर्मचारियों से सम्बंधित कुछ बाते आपके सामने लाना चाहता हूँ। मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की विभिन्न मांगें रही हैं, वेतन विसंगति से लेकर पेंशन बहाली का मुद्दा बड़े मुद्दों में से रहा है। मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की कई सारी मांगें समय के साथ मान ली गई थीं, प्रदेशव्यापी मुद्दा केवल 2 ही रह गये हैं - पुरानी पेंशन बहाली अथवा संशोधित पेंशन योजना, आवास भत्ता।
दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के लिपिक वर्गीय सरकारी कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर होने के आसार प्रत्येक चुनाव से पूर्व लगता है, परन्तु किसी भी प्रकार से लिपिक / क्लर्क की मांग वेतन विसंगति दूर कर वेतन बढ़ाये जाने को दरकिनार कर दिया जाता है। आज इस लेख में संक्षिप्त में हम इन्हीं सभी पहलुओं की चर्चा वर्तमान दौरान पर करेंगे।
लिपिक वेतन विसंगति - 2018 में मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पूर्व सरकार ने लगभग 51 पदों से भी अधिक का वेतनमान बढ़ा दिया था, परन्तु सबसे पुराना वेतन विसंगति का मामला लिपिकों के साथ रहा था, जिसे सरकार ने कमेटी बनाकर मामला फिर से रफा दफा कर दिया। लगभग पिछले 40 वर्षों में 10 से भी अधिक कमेटियों ने लिपिकों की वेतन विसंगति दूर कर वेतन बढ़ाये जाने की सिफारिश की, परन्तु सरकार ने लिपिकों के साथ न्याय नहीं किया। जुलाई 2024 में अचानक से ख़बर सामने आई कि सरकार लिपिक वर्गीय कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने वाली है इसके लिए सिंघल कमेटी की अनुसंशाएं लागू होने जा रही हैं, अचरज की बात तो यह थी कि मध्यप्रदेश लिपिक कर्मचारी संघ के शीर्ष नेतृत्व को इस कमेटी और इसके अनुसंशाओं की भनक तक न थी। विरोध हुआ तो सिंघल आयोग के खत्म हो रहे कार्यकाल को पुन: 6 माह के लिए बढ़ा दिया गया और दिसम्बर 2024 से पहले लिपिकों के वेतन को बढ़ाने की सिफारिश का वायदा किया। यह माह नवम्बर 2024 है, अलग माह समाप्त हो रहे सिंघल आयोग और उसकी सिफारिशों की अटकलों को दरकिनार करते हुए लिपिकों के वेतन को बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश की सरकार फिर से एक कमेटी बनाने वाली है, जिसकी रिपोर्ट तकरीबन 1 साल बाद आएगी। लिपिक / क्लर्क कर्मचारी संघ ने इस पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं की है। आशंका यही है कि मध्यप्रदेश के लिपिकीय पद को धीरे-धीरे समाप्त कर दिया जाएगा, एवं आउटसोर्स प्रथा को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे लिपिकों की वेतन विसंगति दूर होने का 1 प्रतिशत भी सम्भावना नहीं रह जाएगी।
महंगाई भत्ता की अनियमितता से पेंशन व वेतन में नुकसान - एनपीएस में आने वाले मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को देरी से मिलने वाले व अनियमित दिनांक से मिलने वाले महंगाई भत्ता / डीए के कारण एनपीएस फण्ड में ज़मा राशि में देरी होती है, साथ ही कम योगदान से भविष्य में कम पेंशन वे पेंशन कॉर्पस तैयार हो पाता है। साथ ही प्रतिमाह मिलने वाला एरियर राशि का नुकसान भी होता है। इसी मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार ने केन्द्रीय तिथि से कर्मचारियों को केन्द्र के समान महंगाई भत्ता / डीए देने का वायदा किया है। परन्तु आज दिनांक तक भी मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारी 3 प्रतिशत कम महंगाई भत्ता पा रहे हैं, इससे उनमें आक्रोश है।
आवास भत्ता / एचआरए में सस्पेंश बरकरार - मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को अत्यल्प आवास भत्ता मिलता है। जहां किसी पद के केन्द्रीय कर्मचारी को 5000/- रूपये आवास भत्ता मिलता है, वहीं मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारी को लगभग 300/- रूपये आवास भत्ता मिलता है। पूर्व में भी मध्यप्रदेश की सरकार ने आवास भत्ता में सुधार के लिए कई वायदे किये जैसे हायर पर्चेस मॉडल आदि, परन्तु सब सिर्फ एक आश्वासन ही था, ज़मीनी हक़ीकत से काफी दूर। आवास भत्ता मध्यप्रदेश में यहां तक चिंता का विषय बना हुआ है कि मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को एचआरए 7वें वेतनमान में अब तक नहीं मिल पा रहा, जबकि इसे लागू हुए लगभग 9 साल हो गये। अगले साल बाद 8वां वेतनमान आएगा, परन्तु मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को 7वें वेतनमान का लाभ आज तक नहीं मिल पाया है।
8वां वेतन आयोग - मध्यप्रदेश की सरकार भी केन्द्र सरकार के नक्शे कदम पर चलकर अगला वेतनमान लाएगी। केन्द्र की सरकार ने कुछ समय पूर्व 8वें वेतनमान के बारे में इनकार कर दिया था, परन्तु टीवी सोमनाथ जी ने एक इंटरव्यू में कहा कि 8वां वेतन आयोग आने में 1 साल का समय है, और इशारा किया कि यह ज़रूर आएगा। क्योंकि डीए का बेसिक वेतन में मर्जर भी नहीं हुआ, जिसकी अटकलें कुछ समय पूर्व लग रही थीं। फिलहाल के लिए मध्यप्रदेश की सरकार ने आधिकारिक रूप से 8वें वेतन आयोग पर अपना कोई रूख नहीं दिया है।
यूपीएस पेंशन मॉडल का विकल्प जल्द - सूत्रों की मानें तो मध्यप्रदेश की सरकार नए साल पर यूनीफाईड पेंशन योजना को मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए विकल्प के तौर पर सामने लाएगी। दरअसल एनपीएस व यूपीएस में से अधिकांश सरकारी कर्मचारियों की पसंद एनपीएस ही है जिनकी सम्भावित सेवा अवधि 20 साल या अधिक है, क्योंकि यूपीएस में एनपीएस के तहत कट रहे फण्ड को सरकार जप्त कर लेगी। फिलहाल के लिए देशभर में कर्मचारियों ने यूपीएस पेंशन का बहुत विरोध किया है, परन्तु मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारी पेंशन को लेकर अधिक उत्साहित नहीं दिख रहे हैं क्योंकि यूपीएस पेंशन में केन्द्र सरकार की ओर से सुधार प्रस्तावित है।
उम्मीद है दोस्तों आपको यह लेख पसंद आया होगा। हम ऐसे ही सरकारी कर्मचारियों से सम्बंधित ख़बरें लाते रहेंगे। हमारे साथ बने रहिएगा। धन्यवाद।
मध्यप्रदेश के कर्मचारियों एवं पेंशनर्स में भ्रम की स्थिति निर्मित हो गई जब मीडिया में यह बात चलने लगी कि मध्यप्रदेश सरकार ने 18 जुलाई 2024 की केबिनेट में 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता व राहत बढ़ा दिया है। परन्तु यह 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता व राहत बढ़ने के उपरांत भी 42 से बढ़कर 46 प्रतिशत डीए/डीआर होने की बात कही गई। असल में इस तथ्य को अखबार एवं समाचार पत्रों में सही ढंग से न तो प्रस्तुत किया गया और न ही सरकार की तरफ से वास्तविक सोशल मीडिया हैण्डल्स के द्वारा तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत की गई।
पिछले महंगाई भत्ता व राहत के आदेश का सिर्फ अनुमोदन - दरअसल मध्यप्रदेश की सरकार ने राज्य कर्मचारियों का 1 जुलाई 2024 से जबकि पेंशनर्स का 1 मार्च 2024 से क्रमश: महंगाई भत्ता व महंगाई राहत बढ़ाने का निर्णय लिया था, जिसका अनुमोदन मध्यप्रदेश केबिनेट के विभिन्न कारणों से नहीं हो पाया था। उसी पुराने 42 प्रतिशत से 46 प्रतिशत होने के 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता व राहत के आदेश का अनुसमर्थन मध्यप्रदेश की केबिनेट से दिनांक 18 जुलाई 2024 को किया गया। मध्यप्रदेश के कर्मचारियों एवं पेंशनर्स में इस बात का उत्साह था कि सरकार ने 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता व महंगाई राहत 4 प्रतिशत पुन: बढ़ाकर केन्द्र के समान 50 प्रतिशत महंगाई भत्ता कर दिया है, परन्तु यह निराशाजनक ख़बर थी कि उस महंगाई भत्ते का अनुसमर्थन किया गया जिसका लाभ मध्यप्रदेश के कर्मचारियों व पेंशनर्स को पिछले कई महीनों से मिलता आ रहा है।
मध्यप्रदेश के अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने केन्द्र के समान महंगाई भत्ता व राहत की मांग के लिए सरकार ने निवेदन किया है और सूचक तौर पर बताया है कि यदि कर्मचारियों का महंगाई भत्ता/राहत इसी माह केन्द्र के समान 50 प्रतिशत होने का आदेश नहीं आता है तो मज़बूरन संयुक्त मोर्चे को अगले माह से आन्दोलन की राह इख्तियार करना पड़ेगा। साथ ही लिपिकों की वेतन विसंगति के लिए बने सिंघल आयोग के कार्यकाल बढ़ाये जाने को लेकर भी अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा चिंतित है, क्योंकि मध्यप्रदेश के क्लर्क/लिपिकों की वेतन विसंगति पिछले 40 वर्ष से चली आ रही है व आयोग के कार्यकाल बढ़ाये जाने से लिपिकों को आश्वासन के सिवाय कुछ हाथ नहीं लगा।
अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा इसी माह 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता व राहत बढ़ने का इंतज़ार कर रहा है क्योंकि अगले ही माह 19 अगस्त 2024 को रक्षाबन्धन है और पिछले लगभग 7 माह से मध्यप्रदेश के कर्मचारी 4 प्रतिशत कम केन्द्र से डीए / डीआर प्राप्त कर रहे हैं।
म.प्र. कर्मचारी/पेंशनर्स के 4% डीए/डीआर की झूठी ख़बर चल पड़ी है ...
दोस्तों, मेरा नाम अभिषेक है। अब इस बात की उम्मीद नहीं कर रहा कि मध्यप्रदेश के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों का वेतनमान 1900 ग्रेड पे से बढ़ेगा, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में अथक प्रयास व समर्पण करने के बाद भी हमने देखा कि किस प्रकार मध्यप्रदेश लिपिक वर्गीय कर्मचारियों में एकता की कमी की वजह से लिपिक वेतन विसंगति दूर न हो सकी और बात के जाल में लिपिकों के सपने फंसते चले गये।
इस लेख में हमारा मकसद सिर्फ मध्यप्रदेश के लिपिकों को इस बात का अंजादा दिलाना है कि मध्यप्रदेश के लिपिकों के पक्ष में वर्षों पूर्व कई बार माननीय न्यायालय द्वारा एवं सरकार द्वारा बनाई हुई कमेटियों द्वारा भी लिपिकों/क्लर्क के वेतनमान उन्नयन के पक्ष का समर्थन किया गया, परन्तु लिपिकों के अधिकार को छीना रखा गया।
पिछले वर्ष लगभग 42 दिन के आन्दोलन के बाद हरियाणा लिपिकों का वेतन उन्नयन करने के लिए कमेटी गठन करने की बात हरियाणा सरकार ने किया था। हरियाणा लिपिकों का वेतन 1900 ग्रेड पे थे जिसे 35400 कराने की मांग पर लिपिक संघ अड़ा हुआ था। सरकार ने तब भी 21700 का प्रस्ताव रखा, परन्तु लिपिकों ने विरोध ज़ारी रखा। सरकार के कमेटी निर्माण के आश्वासन की बात को लिपिक संघ ने मान लिया एवं कुछ माह इंतज़ार बाद सरकार ने 21700 मूल वेतन की अधिसूचना ज़ारी कर दिया जिससे लिपिकों को वेतन में कई हज़ार का फायदा मिलने वाला है।
सरकार के उक्त आदेश से हरियाणा लिपिक संघ आहत है, उनकी मांग 35400 मूल वेतन की थी, इसके लिए हरियाणा लिपिक संघ अब भी संघर्षशील है। हम आपको बता देना चाहेंगे कि हरियाणा में इसी साल 2024 में विधानसभा चुनाव भी हैं, तो लिपिकों की मांग पर सरकार दोबारा अमल कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक सरकार लोकसभा चुनाव बाद हरियाणा लिपिकों का वेतन 21700 से फिर उन्नयन कर 2800 के आसपास कर सकती है।
मध्यप्रदेश में भी पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव से पूर्व कई संवर्गों जैसे आशा, ऊषा, आंगनवाड़ी, पटवारी, संविदा, रोजगार सहायक, शिक्षक, तहसीलदार आदि पदों को आर्थिक लाभ दिया गया, परन्तु लिपिक संवर्ग को पिछले 40 वर्षों से इस भ्रम में रखा गया कि कमेटी के मुताबिक उनका वेतनमान बढ़ा दिया जाएगा, इसी सपने को संजोए बहुतायत लिपिक रिटायर तक हो गये। मध्यप्रदेश में लिपिकों के अधिकार की बात करने वाला कोई नहीं रहा, जिसने बात की उसकी आवाज़ को दबाने का प्रयत्न किया गया। इस सबके जिम्मेदार स्वयं लिपिक भी हैं जो लिपिक की आर्थिक तंगी का मज़ाक उड़ाने से बाज नहीं आते। समय की दरकार है कि मध्यप्रदेश के समस्त विभाग के समस्त लिपिकों को एक राय होकर वेतन विसंगति दूर कराने की मांग पुन: प्रारम्भ करनी चाहिए।
महंगाई के इस दौर में सरकारी कर्मचारियों को अपने सपने पूरे करने के लिए ऊपरी कमाई की आवश्यकता होती है। सरकारी कर्मचारी नौकरी में आने के बाद रूपये कमाई के अन्य तरीके भी ढूँढ़ता रहता है। निम्न स्तर के सरकारी कर्मचारियों का वेतन अत्यल्प होता है, अतएव उनके परिवार को आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ता है। निम्न स्तर पर नौकरी कर रहे अधिकांशत: ऐसे कर्मचारी होते हैं जिनके पास न तो खेती की ज़मीन पर्याप्त होती है और न ही इतना धन होता है कि कहीं इन्वेस्ट करके उससे वे रूपये कमा सकें। ऐसे में ऊपरी कमाई होना बहुत आवश्यक है।
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| ऑनलाईन कमाई |
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 से कुछ दिन पूर्व ही इन राज्यों ने निर्वाचन आयोग के पास 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने की अनुमति के लिए प्रस्ताव भेजा था, जिसमें राजस्थान को मिली अक्टूबर माह के अंतिम दिन अनुमति मिली, तत्पश्चात राजस्थान ने अपने सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता मौजूदा 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 46 प्रतिशत कर दिया था। दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाये जाने की अनुमति दे दिया, परन्तु मध्यप्रदेश के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाने की अनुमति नहीं दिया। राज्यों द्वारा अनुमति हेतु प्रस्ताव आचार संहिता के कारण भेजना पड़ा था। अब इन सभी राज्यों में चुनाव परिणाम आ चुके हैं।
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| 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता |
शासकीय कर्मचारी स्वैच्छिक रिटायरमेंट भी ले सकते हैं। वर्तमान नियम के मुताबिक यदि कर्मचारी 20 वर्ष की सेवा पूर्ण कर लेते हैं (सैन्य 15 वर्ष) अथवा उनकी उम्र 50 वर्ष हो गयी है तो वह कर्मचारी स्वैच्छिक रिटायरमेंट ले सकता है।
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| वीआरएस |
सरकारी कर्मचारियों को स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने से पहले इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि वह वीआरएस के लिए कम से कम 20 वर्ष की सेवा के बाद ही आवेदन करें, उनका साधारण त्यागपत्र वीआरएस की श्रेणी में नहीं आएगा। कर्मचारियों को 20 वर्ष की सेवा पूर्ण करने के बाद पेंशन एवं अन्य रिटायरमेंट सुविधाओं की पात्रता प्राप्त हो जाती है।
पुरानी पेंशन प्राप्त करने वालों के लिए वीआरएस - जो कर्मचारी 2004 के पूर्व (म.प्र. कर्मचारियों के लिए) सरकारी सेवा में आए हैं और वह वीआरएस लेना चाह रहे हैं तो उन्हें पुरानी पेंशन योजना की पात्रता प्राप्त हो जाती है। वीआरएस लेने के लिए आवेदन 20 साल सर्विस के बाद कभी भी जिस माह से रिटायरमेंट लेना हो उससे 3 माह पूर्व ही आवेदन करना होगा अथवा 3 माह के वेतन मय भत्तों के सरकार के पास देकर उसी माह से वीआरएस लिया जा सकता है।
एनपीएस कर्मचारियों के लिए वीआरएस - एनपीएस की श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों को वीआरएस लेने की प्रक्रिया पुरानी पेंशन की श्रेणी में आने वाले कर्मचारियों के समान ही है। एनपीएस में भी वीआरएस में पेंशन की पात्रता होती है परन्तु कुल एनपीएस में जमा राशि का 80 प्रतिशत एन्युटी के रूप में पेंशन प्लान के रूप में कर्मचारियों को लेना आवश्यक हो जाता है, क्योंकि 62 वर्ष से पूर्व एनपीएस में जमा राशि अपेक्षया कम होती है जिससे वीआर प्राप्त कर्मचारी को प्राप्त पेंशन बहुत कम हो सकती है। एनपीएस कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन प्राप्त कर्मचारियों की भॉंति प्रक्रिया से गुजरना होता है।
सरकार कर सकती है वीआरएस अमान्य - यदि किसी कर्मचारी को सस्पेंड किया गया है अथवा उसके खिलाफ़ न्यायालय में अभियोजन चल रहा है, ऐसे में उस कर्मचारी के वीआरएस (स्वैच्छिक रिटायरमेंट) को सरकार अस्वीकार कर सकती है।
साथियों, उम्मीद है आपको यह जानकारी पसंद आयी होगी। धन्यवाद।
मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 से कुछ दिन पूर्व ही चुनाव आयोग ने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा भेजी गई डीए प्रस्ताव फाईल को अनुमति नहीं दिया। दीवाली पर्व होने के साथ ही कर्मचारियों को महंगाई भत्ता बढ़ने की आस लगी हुई थी। आचार संहिता लगे होने और आगामी चुनाव के कारण निर्वाचन आयोग ने मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा भेजे गये तात्कालीन प्रस्ताव को सहमति नहीं दिया।
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| म.प्र. कर्मचारी समाचार |
समाचार सूत्रों की माने तो मध्यप्रदेश शासन ने पुन: निर्वाचन आयोग के पास महंगाई भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव को भेजा है। साथ ही नईदुनिया समाचार के मुताबिक चुनाव आयोग के पदाधिकारियों से उनकी बात होने पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चुनाव सम्पन्न होने के बाद आचार संहिता में भी चुनाव आयोग महंगाई भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति दे देगा। इस बात से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों का 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ जाएगा जिससे वर्तमान दर 42 प्रतिशत डीए से बढ़कर 46 प्रतिशत डीए शासकीय कर्मचारियों को प्राप्त होगा।
समाचार के मुताबिक इसी हफ्ते चुनाव आयोग डीए बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूर कर लेगा जिससे सरकार भी इसी माह आदेश जारी कर देगी। फलत: सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता 46 प्रतिशत हो जाएगा, परन्तु यह देखने वाली बात रहेगी कि क्या कर्मचारियों को मिलने वाला यह महंगाई भत्ता 1 जुलाई 2023 के दिनांक से मिलकर पुराना डीए एरियर भी मिलेगा अथवा तात्कालीन प्रभाव से पुरानी पद्धति के तहत अगले माह से मिलना प्रारम्भ होगा। जैसा भी हो कर्मचारियों के खाते में नवम्बर के वेतन के साथ बढ़ा हुआ वेतन मिलने की पूरी सम्भावना है।
सरकार ने 1 जनवरी 2023 से 30 जून 2023 तक के महंगाई भत्ता के एरियर को माह अक्टूबर, नवम्बर व दिसम्बर के वेतन के साथ 3 समान किस्तों में देने का परिपत्र ज़ारी किया गया था, मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में तो उक्त एरियर के लिए बिल भी लगा दिया गया परन्तु कोषीय कारणों से उक्त एरियर कर्मचारियों को न मिल सका। संभावना व्यक्त की जा रही है कि अगले सप्ताह से उक्त एरियर भी कर्मचारियों को दे दिया जाए।
कर्मचारियों एवं कर्मचारी संगठनों में इस बात को लेकर काफी निराशा रही है कि दीवाली से पूर्व कर्मचारियों को न तो महंगाई भत्ता मिल पाया और न ही एरियर का पैसा। कर्मचारियों की अन्य बड़ी मॉंगें जैसे पुरानी पेंशन, आवास भत्ता, वेतन विसंगति आदि मामलों का भी हल सामने नहीं आ सका जिस वजह से कर्मचारियों की दीवाली इस वर्ष फीकी ही रही है।
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| 4 प्रतिशत डीए |
साल में दो बार सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता सरकारें बढ़ाती हैं। यह दोनों महंगाई भत्ता उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित होते हैं। छमाही बढ़ने वाला महंगाई भत्ता पहले चक्र में 1 जनवरी से 30 जून तक के लिए लागू किया जाता है, जबकि अगला चक्र 1 जुलाई से 31 दिसम्बर तक के लिए लागू किया जाता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आंकड़ा किसी भी माह का उस माह में न आकर अगले माह के अंतिम कार्यदिवस को आता है, इस वजह से सरकारें महंगाई भत्ता सामान्यतया मार्च (पहला चक्र) एवं सितम्बर-अक्टूबर (दूसरा चक्र) माह में बढ़ाती हैं।
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| महंगाई भत्ता बढे़गा |
पहले चक्र में माह मार्च में होली से पहले सरकारें महंगाई भत्ता बढ़ाती हैं तथा दूसरे चक्र में दशहरे-दीवाली के पहले महंगाई भत्ता बढ़ाया करती हैं। इस साल 2023 में दशहरा 15 अक्टूबर से प्रारम्भ हो रहा है, जबकि अगले माह 11 नवम्बर को दिवाली है। सामान्यतया केन्द्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते बढ़ाने के आदेश के बाद ही क्रमश: राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ा दिया करती हैं। दशहरा इस वर्ष 2023 में 24 अक्टूबर को है, जबकि सरकारी कार्यालयों में 20 तारीक के बाद वेतन आहरण के लिए आवेदन कर दिया जाता है। नवरात्रि पर्व 15 अक्टूबर के पहले 11 अक्टूबर 2023 को केन्द्रीय सरकार की कैबिनेट बैठक होने वाली है। पूरी सम्भावना बन रही है कि केन्द्रीय सरकार कल ही अपने सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाने पर सहमति बना ले।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुसार 1 जुलाई 2023 से बढ़कर आने वाले महंगाई भत्ते में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने वाली है। इस प्रकार सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 42 प्रतिशत से बढ़कर 46 प्रतिशत हो जाएगा। बकाया 3 माह का एरियर भी सरकारी कर्मचारियों को प्रदान कर दिया जाएगा। सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि के आदेश नवरात्रि पर्व में आ सकता है जिससे अगले माह के वेतन के साथ कर्मचारियों का बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता जुड़कर आए।
दूसरी तरफ माह जुलाई एवं अगस्त 2023 के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर नज़र डालें तो इन दोनों माह का मिलकर 2.8 प्रतिशत डीए वृद्धि को दर्शाता है। माह सितम्बर से दिसम्बर के आंकड़ों के आधार पर जुलाई-दिसम्बर अंतिम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तैयार होगा, जिसके बारे में पूरी सम्भावना है कि यह 4 प्रतिशत से अधिक ही रहने वाला होगा। फलस्वरूप सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 1 जनवरी 2024 से 50 प्रतिशत पार कर जाएगा जिससे कर्मचारियों के वेतन-भत्तों में पुन: बढ़ोतरी के साथ संशोधन प्रस्तावित होगा।
वीडियो देखें - सरकारी कर्मचारियों का कल बढ़ सकता है 4% महंगाई भत्ता । हो जाएगा 46% डीए (DA)
मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की लगभग कोई भी मॉंग मध्यप्रदेश सरकार द्वारा नहीं मानी गई है। मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारी लगातार पुरानी पेंशन योजना बहाली के साथ आवास भत्ता, लिपिक वेतन विसंगति, पटवारी वेतन विसंगति आदि की मॉंग करते आए हैं परन्तु सरकार द्वारा फिहलाल इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया है। विधानसभा चुनाव 2023 से पहले 9 अक्टूबर 2023 की कैबिनेट बैठक महत्वपूर्ण रहने वाली है। समाचार सूत्रों की मानें तो आज की बैठक कर्मचारियों के नाम रहने वाली है।
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| कर्मचारी समाचार |
आरक्षण द्वारा किसी भी वर्ग के लोगों का उत्थान किया जाता है। मध्यप्रदेश में महिलाओं को पूर्व में मिल रहे 33 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 35 प्रतिशत कर दिया गया है। अधिसूचना में इस बात का उल्लेख है कि वन विभाग को छोड़कर मध्यप्रदेश के अन्य सभी विभागों में महिलाओं के लिए सीधी भर्ती में 35 फीसदी आरक्षण प्राप्त होगा। कुछ विभाग जैसे शिक्षक भर्ती में लगभग 50 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रावधान मध्यप्रदेश की सरकार ने किया है।
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| म.प्र. महिला आरक्षण 35 फीसदी |
इस सम्बंध में मध्यप्रदेश की सरकार ने दिनांक 03 अक्टूबर 2023 को असाधारण राजपत्र के माध्यम से अधिसूचना ज़ारी किया है। इस नियमावली के बाद मध्यप्रदेश के विभागों में महिला कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी आएगी। मध्यप्रदेश में सरकारी भर्तियों में महिला आरक्षण को 35 प्रतिशत करने का फैसला महिला सशक्तिकरण हेतु किया गया है। भविष्य में आने वाली भर्तियों में अब कुल पदों का 35 प्रतिशत महिला अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित रहेगा। मध्यप्रदेश में पूर्व में महिला कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त 7 दिन के आकस्मिक अवकाश का भी प्रावधान किया गया और हाल ही में महिलाओं के लिए सरकारी भर्तियों में 35 प्रतिशत आरक्षण कर दिया गया।
पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहे सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा की फिक्र है। नई पेंशन योजना के तहत आ रहे कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद मिल रही पेंशन अत्यल्प (कुछ को लगभग 1000/- रू मात्र) है, जो वर्तमान की महंगाई को मद्देनज़र रखते हुए नगण्य है। ऐसे में कई राज्य सरकारों (जैसे राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश) ने पुरानी पेंशन योजना फिर से बहाल कर दिया है। कुछ राज्यों ने पुरानी पेंशन बहाली की असमर्थता को ध्यान में रखने हुए बीच का रास्ता निकाला है, जैसे आन्ध्र प्रदेश की सरकार ने आन्ध्रा पेंशन मॉडल प्रस्तुत किया।
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| मिनिमम पेंशन स्कीम बनाम पुरानी पेंशन योजना |
पुरानी पेंशन बहाली की मांग सरकारी कर्मचारी इसलिए भी कर रहे हैं क्योंकि पुरानी पेंशन में -
1. अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत मूल पेंशन बनता है।
2. मूल पेंशन पर साल में देय 2 बार महंगाई भत्ता/राहत (डीआर) बढ़ता है।
3. मूल पेंशन में वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर वृद्धि हो जाती है।
4. पेंशन के लिए कर्मचारियों के वेतन से कोई कटौती नहीं होती है।
5. जीपीएफ का प्रावधान है जिसे कर्मचारी सुविधानुसार कभी प्रयोग कर सकता है।
6. परिवार पेंशन भी प्राप्त होती है।
परन्तु 2004 के बाद से एनपीएस प्राप्त कर रहे कर्मचारियों को उपरोक्त कोई भी प्रावधान नहीं है, बल्कि वेतन से ही कटौती का पैसा शेयर बाज़ार में लगता है और बदले में वह पैसा लॉक होने के बाद कर्मचारी आवश्यकतानुसार आहरित नहीं कर सकता है। दूसरी तरफ आंध्र पेंशन मॉडल में कर्मचारियों के वेतन से एनपीएस की तरह कटौती तो होती है, परन्तु जीपीएफ के अलावा अन्य सुविधाएं पुरानी पेंशन की तरह ही हैं। आन्ध्रप्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने आंध्र मॉडल का अधिक स्वागत नहीं किया क्योंकि उनके वेतन से कट रहे 10 प्रतिशत का कॉर्पस उनको बाद में मिल रहे पेंशन से भी अधिक हो सकता है।
राज्यों द्वारा सुझाया गया मिनिमम पेंशन स्कीम - इस स्कीम के तहत पुरानी पेंशन योजना की तरह सभी प्रावधान होंगे, परन्तु मूल पेंशन अंतिम वेतन का 50 प्रतिशत न होकर प्रारम्भिक मूल वेतन पर निर्भर करेगा। अर्थात् यदि कोई कर्मचारी 19500/- के मूल वेतन पर सरकारी नौकरी ज्वाईन करता है तो उसे रिटायरमेंट पर पेंशन लगभग 10 हज़ार मिलेगा, साथ ही अन्य भत्ते भी पुरानी पेंशन की भॉंति मिलेंगे। अब समस्या इस बात की होगी कि क्या 40 साल बाद किसी कर्मचारी को मिलने वाली उतनी पेंशन उस समय की महंगाई के अनुसार सही होगी अथवा नहीं। अथवा सरकार वेतन आयोग के माध्यम से यदि मूल वेतन को भविष्य में सुधारती है तो पेंशन भी तात्कालिक महंगाई के अनुरूप होगा, जो उचित होगा।
फिलहाल इस जानकारी का स्त्रोत न्यूज18 है और अभी कोई भी राज्य एवं केन्द्र सरकार ने इस पेंशन योजना को अपनाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं किया है। आपकी इस बार में क्या राय है, क्या मिनिमम पेंशन योजना राज्य की आर्थिक स्थिति को ठीक रखने के लिए सही रहेगी अथवा कोई अन्य योजना उचित होगी?
दोस्तों, मेरा नाम अभिषेक है। मैं एक क्लर्क संवर्ग से ताल्लुकात रखता हूँ। पिछले 4 साल से भी अधिक इस संवर्ग में कार्यरत हूँ। बदलाव तेजी से हो रहा है। मुझे याद है कुछ वक्त पहले तक मध्यप्रदेश के विभिन्न विभागों में लिपिक संवर्ग की भर्ती बहुतायत में हो रही थी और लगभग प्रत्येक डेस्क/काम के एक लिपिक तैनात था। समय बदलता गया और उसकी जगह एक लिपिक ही कम्प्यूटर के माध्यम से कई डेस्क का काम सम्पन्न करने लगा। आज हम ट्रांजिट मोड पर हैं जहां से आगे अब लिपिकों की संख्या बढे़गी नहीं अपितु कम जरूर होगी। लिपिकों का मुख्य काम डेटा की एण्ट्री करना और टायपिंग सम्बंधित काम ही था, जो समय के साथ ऑटोमेटेड तकनीकि ने ले लिया और आज नए-नए फीचर्स के साथ आर्टिफिशल तकनीकि सामने आ रही है।
उदाहरण के तौर पर गूगल लेंस, स्पीच, ट्रांसलेशन आदि को यदि देखा जाए तो कोई भी टायपिंग (कोई भी भाषा) का काम बिना किसी टायपिस्ट के बोलकर कर सकता है। गूगल लेंस की मदद से हार्डकॉपी में मौजूद टेक्स्ट को तत्काल डिजिटल यूनिकोड में बदल सकता है। एक भाषा बोलकर दूसरे में अनुवाद कर सकता है। मैंने तो यहॉं तक पाया है कि यह काम करने में बड़ी मशीन की जगह स्मार्ट मोबाईल फोन से ही किया जा सकता है। डेटा की शुद्धता और जटिल कार्य हेतु अभी आर्टिफिशियल बौद्धमिकता ने इंसान का स्थान नहीं लिया है, परन्तु जल्द ही यह आम इंसान को दरकिनार करने में सफल रहेगा। बेरोजगारी की समस्या तो बड़ी रही है, परन्तु आने वाले समय में इसके बढ़ने की और भी सम्भावनाएं हैं क्योंकि क्योंकि उपक्रम तकनीकि, मशीनरी आदि का प्रयोग करके लागत वैल्यू को कम करने का प्रयास करता है।
भारत जैसे समाजवादी देश में राज्य एक समाजवादी नीति के तहत नागरिकों को सरकारी नौकरी के अवसर प्रदान करता आया है, परन्तु समय की मॉंग को देखते हुए कुछ अव्यवहारिक पदों को समाप्त भी किया जाता रहा है। जिस प्रकार से लिपिक/क्लर्क संवर्ग में आए दिन समय के साथ उच्च योग्यता का निर्धारण किया गया है और साथ-ही-साथ बदलती तकनीकि को अपनाना सभी की ज़रूरत एवं मज़बूरी भी बन गई है, उन पारम्परिक पदों का समाप्त होना तय है जो आज ऐसे काम को कर रहे हैं जिनकी जगह कम्प्यूटर/तकनीकि/डिजिटल उपकरण ले रहे हैं।
उदाहरण के तौर पर हम कुछ ऐसे गैजेट्स, उपकरण आदि की बात करेंगे जिन्होंने समय के साथ हो रहे बदलाव को समझने की बजाए पारम्परिक तरीके से मुनाफा कमाने पर ज़ोर दिया और अंतत: वह उपकरण/कम्पनी ही बन्द हो गईं। किसे पता था कि डिजिटल/स्मार्ट मोबाईल फोन के आ जाने से रील कैमरा एवं उससे सम्बंधित अनेक व्यवसाय भी समाप्त हो जाएंगे। पारम्परिक टेलीवीजन की जगह स्मार्ट टेलीविजन ने ले लिया है, साथ ही स्मार्ट मोबाईल फोन ने तो टेलीवीजन के भविष्य को ही खतरे में डाल दिया है। अब संक्रमण का ऐसा समय चल रहा है जब डायरेक्ट टू होम की सुविधा देने वाले मीडिया चैनल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि डायरेक्ट टू मोबाईल की ब्रॉडकास्टिंग जल्द ही शुरू होने वाली है।
उपरोक्त की तरह अन्य हज़ारों उदाहरण सामने हैं जो इस बात की ओर इशार कर रहे हैं कि कुछ व्यवसाय और उनसे जुड़ी नौकरियां भी भविष्य में समाप्त हो जाएंगी। सरकार ने ऐसी पोस्ट्स को डाईंग कैडर के तौर पर पहचानना शुरू कर दिया है और जिस प्रकार मध्यप्रदेश में चतुर्थ श्रेणी की नियमित भर्तियों पर पाबंदी लगाकर हाल ही में प्रायवेट/आउटसोर्स के माध्यम से काम कराने पर ज़ोर दिया है, ठीक इसी प्रकार मध्यप्रदेश की समस्त लिपिकीय भर्तियां भविष्य में समाप्त हो सकती हैं। आज सरकारी विभागों में ठेके पर काम कर रहे लिपिकीय/क्लेरिकल कर्मचारियों को देख पाना आम बात हो गई है जिसकी संख्या आए दिन बढ़ती ही जा रही है। सरकार ऐसे संवर्ग पर कोई खासा ध्यान न देते हुए डाईंग कैडर ही समझ रही है और फलस्वरूप इन पदों को वरीयता न देते हुए इनका वेतन भी कम रखा है।
वक्त के साथ इंसान को बदलना आवश्यक होता है। तकनीकि और इंटलीजेंस से जुड़े रोजगार कभी खत्म नहीं होंगे। मानवीय हस्तक्षेप रखने वाले पद भी जैसे वकील, जज, विवेचक, रिसर्चर आदि के पद खत्म नहीं होंगे परन्तु एआई का उसमें भी हस्तक्षेप रहने वाला है। हमने होटलों में काम करने वाले रोबोट से लेकर ट्रैफिक पुलिसिंग करने वाली मशीनों को भी देख लिया है। ड्रोन सिस्टम ने इंसान और वायुयान में कैमरे की तकनीकि का सहारा लेकर कृषि, रक्षा, मनोरंजन आदि क्षेत्रों में अहम योगदान देना प्रारम्भ कर दिया है। क्या यह भविष्य में अमीरी और गरीबी के एक फासले को बढ़ाएगी अथवा सबको समान मौका देने भूमिका निभाएगी, यह देखने वाली बात रहेगी।